बड़ी बुरी हालत है हिमाचल की। दुनिया इक्कसवीं शताब्दी में है और हिमाचल के नेता लोग जनता को बेवकूफ बनाने से बाज नहीं आ रहे। कांग्रेसी अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं। बोल रहे हैं कि हम तैयारियो का जायजा ले रहे हैं। आइसोलेशन वार्ड तो खाली ही नजर आएंगे । बाकि भगवान न करे कि किसी वार्ड में आपको कोई मरीज मिले। मिलेगा तो भी आप भागने में वक़्त नहीं लगाएंगे। कौन सी जादू की जफ्फी देंगे आप उनको ? आप में से कितने लोग ऐसे हैं जो डॉक्टर हैं ? कितनों को ज्ञान-ध्यान है डॉक्टरी एजुकेशन का ? कर क्या रहे हो आप अस्पतालों में जाकर ? फोटो सेशन ही नजर आ रहे हैं। एक भी सामान्य मरीज के साथ आप फोटो तो खिंचवा नहीं रहे । बस जनता का ही “खींच” रहे हो !
अस्पतालों में जाकर वहां के प्रशाषन को खज्जल करना बंद कीजिए,उनको काम पर फोकस करने दीजिए। बहुत बड़ी मदद होगी। कोरोना में वोट बैंक मत तलाशो। आप लोगों से अपनी संगठन की कार्यकारिणी तो बनती नहीं,जनता को क्या बनाना चाहते हो ? मदद नहीं कर सकते तो रुकावट भी न बनो। अपने कांग्रेस सेवादल को ढूंढो और जनता में उतारो। यह दल कांग्रेसी नेताओं को सलामियाँ देने के लिए है क्या ? जनता को भी सलाम करने के लिए इनको आगे लाओ। याद रखना कि यह लड़ाई गांधी फैमिली के लिए नहीं है,यह आम आदमी और उसकी फैमली के लिए जिंदगी की लड़ाई है।

अब भाजपा की सरकार से भी सवाल हैं। इसके मां स्वरूपी संगठन आरएसएस से भी सवाल हैं। सरकार सबसे पहले तो आप जबाव दीजिए, आज तक मन्त्रिमण्डल का इलाज तो ढूंढा नहीं गया। कायदे से चाहिए यह था कि इन हालात में आपके पास स्वास्थ्य मंत्री होता। यह भी नहीं है। चलिए आप मंत्री भी न बनाओ। पर चार जोनों में बंटे प्रदेश में मौजूदा मंत्रियों में से किन्ही चार को जिम्मा दे देते। यह हालात पर नजर रखते । सरकार कोरोना पर तो आपके बारह डीसी ही प्रेस नोट जारी करके नजर रख रहे हैं। पर इन बारह पर आधिकारिक नजर रखने वाला कौन है ? सरकार,लोकतंत्र का मतलब सिर्फ नेताओं के विशेषाधिकार होना ही नहीं है। जनता के भी हक़ होते हैं।
आरएसएस से सवाल है। भाजपा संगठन और सरकार दो दिन से बैठकों में बैठे हैं। जनता उठक-बैठक कर रही है। आरएसएस की पहचान आपातकाल में आम आदमी की मदद करने की है,वो मदद वाले हाथ कहां हैं ? आरएसएस के सेवक ही बताएं कि वह आज कहीं भी नजर क्यों नहीं आ रहे ? जागरूकता के लिए आप अपनी सरकार और संगठन पर शिकंजा क्यों नहीं कस रहे ? क्यों लगाम नहीं कस रहे ? स्वयंसेवक क्यों सरकार सेवक की तरह नजर आ रहे ?

प्लीज, आप राजनीतिक लोग सामाजिक ढांचे की मजबूती के लिए काम करो। जिंदगियां बचीं तो ही सियासत बचेगी…